देदीप्यमान हो आपकी नूतन वर्ष की डगर,
ध्वस्त हो जाय आपदा-अनिष्ट का डर,
कदम कदम पर सफलता से साक्षात्कार हो
पूरी हो हर इच्छा सपने सभी साकार हों
परिजनों में सम्मान तथा गुरुजनों सा ज्ञान हो
निरोगी काया के स्वामी मुख पर मुस्कान हो
परिवार की बगिया में उन्नति के प्रसून खिलें
आगामी वर्षों में भी आमोद निर्विघ्न मिलें
ऐसी कामना सदा आपके लिए हम करते हैं,
नए वर्ष का प्रारंभ नई उमंगों से करते हैं।

  • स्वीटी गुप्ता

जय श्री राम ………..
जग महि ज्ञान कुशल बहुतेरे, जानहिं जनम मरण के फेरे
अति के ज्ञानी काग समाना, बिन बूझे करि ज्ञान बखाना
वेद पुराण ज्ञान कछु नाहीं, रटहु राम केवल मन माहीं
जासु नाम जीवन आधारा, सो करिहै भव सागर पारा।

स्वयं पर गर्व कीजिए …………………………………….

प्रचण्ड वेग ये राष्ट्रवाद का रुकने को तैयार नहीं
और नींद से जागा हिन्दू झुकने को तैयार नहीं

विषदंतों को तोड़ रहे हैं,धर्म से नाता जोड़ रहे हैं
जाग रहे हैं धीरे धीरे, जात पात को छोड़ रहे हैं
यशगाथाएं जान रहे हैं, सर्वश्रेष्ठ हम मान रहे हैं
मानव उत्पत्ति से पहले अपने वेद पुराण रहे हैं
अपनी परम्परा का गौरव तजने को तैयार नहीं
और नींद से जागा हिन्दू झुकने को तैयार नहीं।

उलझने पहले भी थीं इस कदर जीवन में,

कि ऊहापोह की स्तिथि ने मन में घरौंदा बना लिया,

चक्की के पाटों में पिसकर हमने संघर्ष का मजा पा लिया।

भोर से सांझ तक बस पहिए से घूमते रहे,

सांसों का ताना बाना अनायास ही बुनते रहे।

रिश्ते निभाने की चाह थी पर समय ना था,

फ़र्ज़ की राह में चैन का कोई अध्याय ना था,

ज़िन्दगी की पुस्तक के पन्ने अविरल पढ़ते गए,

ज्ञान मिलेगा ये सोचकर सपने गढ़ते गए,

बालों की चांदी ने झांक कर उम्र बताई,

तब जाकर ज़िंदा होने की चेतना आई,

अब बीती ज़िन्दगी की चिंता में घुलने लगे,

शेष दिन बुढ़ापे के तराजू में तुलने लगे।